Shitala Satam Shitala Mata Vrat Parv Katha Story in Hindi English Gujarati Languages

Shitala Satam Shitala Mata Vrat Parv Katha Story in Hindi English Gujarati Languages: Wish you all a very Happy  Shitala Satam Vrat Festival 2016. As we all know that Shitala Statam is scheduled on 24th August 2016. If you are having fast on this day then you should know the story behind this festival. In this article, we are providing Shitala Satam Shitala Mata Vrat Parv Katha Story in Hindi English Gujarati Languages. We hope this will help to celebrate this Shitala Satam vrat festival 2016. Now scroll the page and enjoy this collection.

Shitala Satam Shitala Mata Vrat Parv Katha Story in Hindi English Gujarati Languages

Shitala Mata Vrat Katha In Hindi:

कथा के अनुसार एक साहूकार था जिसके सात पुत्र थे। साहूकार ने समय के अनुसार सातों पुत्रों की शादी कर दी परंतु कई वर्ष बीत जाने के बाद भी सातो पुत्रों में से किसी के घर संतान का जन्म नहीं हुआ। पुत्र वधूओं की सूनी गोद को देखकर साहूकार की पत्नी बहुत दु:खी रहती थी। एक दिन एक वृद्ध स्त्री साहूकार के घर से गुजर रही थी और साहूकार की पत्नी को दु:खी देखकर उसने दु:ख का कारण पूछा। साहूकार की पत्नी ने उस वृद्ध स्त्री को अपने मन की बात बताई। इस पर उस वृद्ध स्त्री ने कहा कि आप अपने सातों पुत्र वधूओं के साथ मिलकर शीतला माता का व्रत और पूजन कीजिए, इससे माता शीतला प्रसन्न हो जाएंगी और आपकी सातों पुत्र वधूओं की गोद हरी हो जाएगी।

साहूकार की पत्नी तब माघ मास की शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि (Magha Shukla Shasti tithi) को अपनी सातों बहूओं के साथ मिलकर उस वृद्धा के बताये विधान के अनुसार माता शीतला का व्रत किया। माता शीतला की कृपा से सातों बहूएं गर्भवती हुई और समय आने पर सभी के सुन्दर पुत्र हुए। समय का चक्र चलता रहा और माघ शुक्ल षष्ठी तिथि आई लेकिन किसी को माता शीतला के व्रत का ध्यान नहीं आया। इस दिन सास और बहूओं ने गर्म पानी से स्नान किया और गरमा गरम भोजन किया। माता शीतला इससे कुपित हो गईं और साहूकार की पत्नी के स्वप्न में आकर बोलीं कि तुमने मेरे व्रत का पालन नहीं किया है इसलिए तुम्हारे पति का स्वर्गवास हो गया है। स्वप्न देखकर साहूकार की पत्नी पागल हो गयी और भटकते भटकते घने वन में चली गईं।

वन में साहूकार की पत्नी ने देखा कि जिस वृद्धा ने उसे शीतला माता का व्रत करने के लिए कहा था वह अग्नि में जल रही है। उसे देखकर साहूकार की पत्नी चंक पड़ी और उसे एहसास हो गया कि यह शीतला माता है। अपनी भूल के लिए वह माता से विनती करने लगी, माता ने तब उसे कहा कि तुम मेरे शरीर पर दही का लेपन करो इससे तुम्हारे Šৠपर जो दैविक ताप है वह समाप्त हो जाएगा। साहूकार की पत्नी ने तब शीतला माता के शरीर पर दही का लेपन किया इससे उसका पागलपन ठीक हो गया व साहूकार के प्राण भी लट आये।

शीतला माता व्रत विधि (Sheetla Mata Vrat Vidhi):

कथा में माता शीतला के व्रत की विधि का जैसा उल्लेख आया है उसके अनुसार अनुसार शीतला षष्ठी के दिन स्नान ध्यान करके शीतला माता की पूजा करनी चाहिए (Sheetla Shasti)। इस दिन कोई भी गरम चीज़ सेवन नहीं करना चाहिए। शीतला माता के व्रत के दिन ठंढ़े पानी से स्नान करना चाहिए। ठंढ़ा ठंढ़ा भोजन करना चाहिए। उत्तर भारत के कई हिस्सों में इसे बसयरा (Basyorra) भी कहते हैं। इसे बसयरा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन लोग रात में बना बासी खाना पूरे दिन खाते हैं। शीतला षष्ठी के दिन लोग चुल्हा नहीं जलाते हैं बल्कि चुल्हे की पूजा करते हैं। इस दिन भगवान को भी रात में बना बासी खाना प्रसाद रूप में अर्पण किया जाता है। इस तिथि को घर के दरबाजे, खिड़कियों एवं चुल्हे को दही, चावल और बेसन से बनी हुई बड़ी मिलाकर भेंट किया जाता है।

इस तिथि को व्रत करने से जहां तन मन शीतल रहता है वहीं चेचक से आप मुक्त रहते हैं। शीतला षष्ठी (Sheetla Sasti) के दिन देश के कई भागो में मिट्टी पानी का खेल उसी प्रकार खेला जाता है जैसे होली में रंगों से।

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Shitala Mata Vrat Katha In English

 

Shitala Satam Vrat Katha, Story of Sheetala Saptami is given here. Shitala Satam is observed in Shravan Month as per Gujarati calendar. Skanda Purana describes the iconography of Goddess Shitala Mata.

Shitala Mata Vrat katha is mentioned in Bhavishyottara Purana. This story is associated with the legend of Indralumna, the King of Hastinapur. Name of his wife was Pramila who had great faith in performing religious ceremonies. And Indralumna’s son was Mahadharma and daughter was Shubhakari whose husband is Prince Gunvan.

One year of married life passed happily. When Gunvan went to his in-laws house to fetch his wife, Indralumna asked him to stay over for a couple of days as the next day Shubhakari had to observe Shitala Mata Vrat. Gunvan accepted it.

On the day of Shitala Mata Vrata, Shubhakari went to a lake with her friends to perform Shitala Mata Vrat. But they lost their way in between. Then an old woman came and guided them towards the lake. After reaching the lake, Shubhakari performed the holy bath and observed the vrat.

The old woman was herself Goddess Shitala Mata and she got pleased with the puja of Shubhakari. The goddess asked the princess to state any wish, but Shubhakari told that she would ask it if there is any need.

After the Puja, Shubhakari and her friends wanted to offer some charities to the Brahmin and his wife. There they got know about the death of the Brahmin due to the snake bite. Then Shubhakari asked Shitala Mata a wish to restore the life of the Brahmin. And with the blessings of Shitala Mata, Brahmin got alive and thanked Shubhakari and prayed to the Goddess.

Since then, the people of Hastinapur started performing ‘Shitala Satam Vrat and Puja’.

We hope you enjoyed this collection. So, don’t forget to share this story and Katha collection with your friends and family members. Stay tuned with us for upcoming stuff of Shitala Satam.

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